साईं बाबा (Sai Baba)

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आधुनिक भारत में समाज कल्याण के क्षेत्र में संत मुनियों की विशेष भूमिका रही है। इनमें से कई संतों को लोक-आस्था ने भगवान का दर्जा प्रदान किया है। इन्हीं प्रमुख संतो में से एक हैं शिरडी वाले साईं बाबा।
साईं बाबा का आना
साईं बाबा के जन्म, माता-पिता आदि जानकारियों के विषय में कई मत हैं। उनके धर्म को लेकर भी कई विवाद हैं लेकिन यह सर्वमान्य है कि वह हिन्दू और मुस्लिम दोनों धर्मों में समान रूप से पूजनीय हैं। साईं बाबा को सर्वप्रथम महाराष्ट्र के अहमदनगर के शिरडी गांव में देखा गया था।
साईं बाबा का नाम
मान्यता है कि साईं बाबा को यह नाम उनके भक्तों ने ही दिया है। एक विवाह समारोह में साईं बाबा को एक भक्त ने “आओ साईं” कहकर पुकारा और तभी से यह नाम बाबा के साथ जुड़ गया।
चमत्कारी साईं बाबा
कलयुग में लोग चमत्कार को ही नमस्कार करते हैं। साईं बाबा की प्रसिद्धि में एक कारक यह चमत्कार भी थे। लोगों के दुखों को हर लेना, विभूति से दर्द दूर करना, जल का तेल बनाकर दीपावली मनाना आदि कई चमत्कारों से साईं का जीवन भरा है।
गुरुवार का दिन
गुरुवार के दिन साईं मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इसी दिन साईं नाथ शिरडी पधारे थे।
मृत्यु
28 सितंबर 1918 को विजयदशमी के दिन साईं बाबा ने समाधि ली थी।
साईं मंदिर
साईं बाबा का सबसे बड़ा मंदिर शिरडी में हैं। यह महाराष्ट्र के अहमदनगर में स्थित हैं।

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