टेक समिट में PM मोदी से मिलीं थेरेसा मे, कहा- भारतीयों के लिए ब्रिटेन आना बनाएंगे आसान

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ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरेसा मे अपनी पहली भारत यात्रा पर रविवार देर रात दिल्ली पहुंचीं. सोमवार सुबह इंडिया-यूके टेक समिट में वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ नजर आईं. यूके टेक समिट में उन्होंने कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच खास रिश्ता है. वहीं पीएम मोदी ने कहा भारत के लिए ये गर्व की बात है कि यूरोप से बाहर अपनी पहली यात्रा के लिए थेरेसा मे ने भारत को चुना.
प्रधानमंत्री मोदी ने उम्मीद जताई कि मेक इन इंडिया भारत-यूके संबंधों को प्रगाढ़ करने मे सहायक होगा. वहीं थेरेसा मे ने कहा कि दोनों देश एक विशेष संबंध साझा करते हैं. थेरेसा ने भारत, ब्रिटेन टेक सम्मेलन में कहा, ‘भारत और ब्रिटेन के बीच बहुत संभवानाएं हैं. हमारा संबंध बहुत ही विशेष है.’ उन्होंने ये भी कहा कि ब्रिटेन अर्थव्यवस्था और सामाजिक सुधारों पर काम कर रहा है और भारतीय निवेश से हमारी अर्थव्यवस्था में विविधता लाने में मदद हो रही है.
ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने यह भी कहा कि भारतीयों के लिए ब्रिटेन की यात्रा करना आसान होगा. थेरेसा ने कहा, ‘नियमित तौर पर ब्रिटेन आने वाले भारतीयों के लिए एक पंजीकृत यात्रा योजना है.’ प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद थेरेसा मे की यह पहली भारत यात्रा है.
ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे भारत की तीन दिवसीय यात्रा के लिए रविवार रात दिल्ली पहुंची. ब्रिटेन की कमान संभालने के बाद यह थेरेसा का यूरोप के बाहर और भारत में पहला दौरा है. सोमवार को थेरेसा में का दिल्ली में औपचारिक स्वागत भी किया जाएगा.
3 दिन के भारत दौरे पर आई हैं थेरेसा तीन दिन के भारत दौरे पर आई थेरेसा आठ नवंबर तक रहेंगी और इसी दिन बेंगलुरु के अलसूर स्थित ऐतिहासिक सोमेश्वर मंदिर भी जाएंगी. थेरेसा के साथ आए 40 सदस्यों के दल में बिजनेसमैन ज्यादा हैं, जिससे संभावना जताई जा रही है कि इस दौरे में भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा.
ब्रेक्जिट के बाद व्यापार पर सवाल
गौरतलब है कि ब्रेक्जिट के बाद भारत का व्यापारी समुदाय यूके के साथ व्यापार को लेकर काफी परेशान है क्योंकि व्यापारियों के मुताबिक ब्रेक्जिट के बाद यूके के साथ बिजनेस करना मुश्किल होगा. दोनों देशों के बीच 10 अरब डॉलर तक का द्विपक्षीय व्यापार होता है, जिसके 2020 तक 20 अरब डॉलर तक होने की संभावना है.
भारतीयों छात्रों के वीजा पर बात
इसके साथ ही भारत भारतीय छात्रों के यूके वीजा पर अपनाए जा रहे सख्त रवैये का मुद्दा उठा सकता है क्योंकि पिछले एक साल में पढ़ाई के लिए ब्रिटेन जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में 50 फीसदी की कमी आई है.
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