जिस मज़हब में औरतो का सम्मान नहीं वो मज़हब छोड़ देना चाहिए :तस्लीमा नसरीन

0
6375

अक्सर अपनी बयानों के कारण चर्चा में रहने वाली बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने ट्विटर पर विवादित ट्वीट किए हैं। तसलीमा ने मुसलमानों के पवित्र रमजान महीने पर रोजे रखने पर कटाक्ष किया है।

एक ट्वीट का जवाब देते हुए तस्लीमा ने लिखा, ” मुझे इस्लाम से डर लगता है क्योंकि इस्लाम मानवाधिकार विरोधी, महिलाधिकार विरोधी और बोलने की आजादी का विरोधी है।” तस्लीमा ने स्पष्ट शब्दों में कहा है की जिस मज़हब मे ैरतो का सम्मान नहीं होता उस मजहब को छोड़ देना चाहिए और साथ ही उन्होंने कहा है  की इस्लाम में औरतो के अधिकारों का हनन होता है और इस्लाम को हर तरह से  अधिकार विरोधी बताया है

अभी कुछ दिन पहले सऊदी अरब के वैज्ञानिकों ने औरतों को इंसान मानने से इनकार कर दिया था. सऊदी अरब और तमाम मुस्लिम देशों से महिलायों के साथ बद्सलुखी खबरे आती रहती है.

पत्नी को कैसे पीटा  जाए,मोलवी महिलायों को कैसे छेड़ा जाए ये सब सऊदी अरब के लोगो के वैज्ञानिक सोचते रहते है.ये तो कुछ नहीं एक मोलवी ने तो ये तक भी कह दिया अगर भूक लगी हो और कुछ खाने को ना मिले तो अपनी पत्नी को खा जाओ.

इसी बात पर तस्लीमा नसरीन ने ट्वीट किया की ऐसा मजहब जहाँ महिलायों का सम्मान नहीं होता छोड़ देना चाहिए, और ऐसा नहीं कर सकते तो ऐसे संस्कार त्याग दे क्योंकि अरब देशों में इस्लाम को त्यागने की सजा मौत है.असल में वो मजहब, मजहब कहलाने लायक ही नहीं है.शायद ये मोलवी,ये वैज्ञानिक भूल गए है की ये भी किसी महिला के पेट से ही जन्मे है,अगर महिला ना होती तो आज ये भी दुनिया में ना होते.

6668 Total Views: 9 Today Views:

LEAVE A REPLY