एनजेएसी कानून के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई से हाईकोर्टों को रोका

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नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्टों को न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर बने दो दशक पुराने कॉलेजियम सिस्टम की जगह लेने के लिए राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) कानून और संवैधानिक संशोधन कानून की वैधता को चुनौती देने वाली किसी भी याचिका पर सुनवाई से रोक दिया है।

न्यायमूर्ति एआर दवे की अध्यक्षता वाले तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि इन कानूनों की संवैधानिक वैधता से जुड़े मामले में उच्च न्यायालयें सुनवायी नहीं कर पाएंगी। पीठ ने यह भी कहा कि वह इस पर बाद में फैसला करेगी कि इन याचिकाओं पर विचार किया जाए अथवा नहीं या फिर इसे किसी बड़ी पीठ को भेजा जाना चाहिए।

केंद्र की ओर से पेश हो रहे अटार्नी जनरल (एजी) मुकुल रोहतगी ने इन कानूनों पर रोक लगाने की मांग करने वाली याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि ये समय से पहले दाखिल की गयी हैं क्योंकि कानून अब तक अधिसूचित नहीं हुआ है। अटार्नी जनरल ने कहा कि यह चुनौती समय पूर्व है क्योंकि कानून अभी अधिसूचित भी नहीं हुआ है और इसलिए अंतरिम आदेश (रोक का) का सवाल ही नहीं उठता। साथ ही कहा कि कानून पारित करने की तारीख से मतलब नहीं है। महत्वपूर्ण अधिसूचना की तारीख है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) की ओर से हस्तक्षेप की अनुमति का आग्रह कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने सरकार की इस दलील का समर्थन किया कि मौजूदा ‘कानून कार्यपालिका, न्यायपालिका और नागरिक समाज का बेहतरीन संयोजन है।’ उन्होंने यह भी कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति की मौजूदा व्यवस्था हमेशा से गोपनीयता के आवरण में लिपटी रही है।

वरिष्ठ अधिवक्ता टीआर अद्र्याजिना ने भी इस मुद्दे पर केंद्र के रूख का समर्थन करते हुए कहा कि दुनिया के किसी भी देश में न्यायाधीशों की नियुक्ति वाला ऐसा तंत्र नहीं है। इस पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति जे चेलामेश्वर और मदन बी लोकुर भी शामिल थे। न्यायालय ने इन याचिकाओं पर आगे सुनवाई के लिए 17 मार्च की तारीख मुकर्रर की है।

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